इंदौर में इन दिनों भीषण जल संकट गहराता जा रहा है। शहर के कई इलाकों में लोग पानी के लिए त्राहि-त्राहि कर रहे है। स्थिति यह है कि निजी टैंकर संचालक एक टैंकर पानी के लिए 1000 से 1500 रुपये तक वसूल रहे है। एक निजी जल सप्लायर के अनुसार वह प्रतिदिन लगभग 30 टैंकर पानी की सप्लाई कर रहा है, जिससे उसे करीब 30 हजार रुपये प्रतिदिन की आमदनी हो रही है। इस हिसाब से उसकी मासिक कमाई लगभग 9 लाख रुपये तक पहुंच रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है की नगर निगम की अनदेखी और लापरवाही के कारण निजी सप्लायरों की चांदी हो रही है। निगम ने मानो जल वितरण की जिम्मेदारी निजी लोगों के भरोसे छोड़ दी है, जबकि आम नागरिक पानी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। आरोप यह भी है की नगर निगम द्वारा संचालित टैंकरों का उपयोग आम जनता की बजाय नेताओं, पार्षदों, अधिकारियों और उनके करीबी लोगों के यहां पानी पहुंचाने में किया जा रहा है। आम नागरिकों की समस्याओं पर किसी का ध्यान नहीं है।
सिलिकॉन सिटी क्षेत्र का उदाहरण देते हुए स्थानीय लोग बताते है की यहां प्रतिदिन सुबह 6 बजे से रात 12 बजे तक 100 से अधिक निजी टैंकर पानी की सप्लाई कर रहे है। वहीं निगम के टैंकर केवल नाम मात्र के लिए दिखाई देते है। बताया जाता है की कई मोहल्लों में जल वितरण की जिम्मेदारी निजी व्यक्तियों को सौंप दी गई है, जबकि कुछ स्थानों पर विधायक और पार्षदों के करीबी लोगों के निर्देश पर टैंकर भेजे जा रहे है।
निवासियों का कहना है की वे लगातार संबंधित लोगों से पानी की मांग कर रहे है, लेकिन टैंकर अक्सर प्रभावशाली लोगों और उनके परिचितों के यहां ही पहुंचते है। यदि किसी आम नागरिक के यहां टैंकर पहुंच भी जाए तो उसे केवल दो-चार बाल्टी पानी देकर औपचारिकता पूरी कर ली जाती है।
बताया जाता है की जल वितरण व्यवस्था में कुछ सेवानिवृत्त कर्मचारी, प्लंबर तथा अन्य निजी व्यक्ति सक्रिय भूमिका निभा रहे है। यहां तक की कुछ सरकारी कर्मचारी भी नेताओं और पार्षदों के करीबी होने के कारण जल वितरण के अनौपचारिक ठेकेदार बने हुए है। ऐसे में सिलिकॉन सिटी सहित पूरे इंदौर शहर में जल संकट लगातार गहराता जा रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश मानवाधिकार आयोग ने भी नगर निगम आयुक्त को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उल्लेखनीय है की नगरीय प्रशासन मंत्री का निवास भी इंदौर में ही है, लेकिन इसके बावजूद शहरवासियों को राहत नहीं मिल पा रही है।
शहर में कभी मकान तोड़ने की कार्रवाई, कभी दूषित पेयजल और अब जल संकट जैसी समस्याओं से जनता लगातार परेशान है। ऐसे में सवाल उठ रहा है की क्या नगर निगम और महापौर इस संकट को दूर करने के लिए कोई ठोस कदम उठाएंगे या फिर जनता इसी तरह परेशान होती रहेगी?
दिलचस्प बात यह भी है की इंदौर में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी निवास करते है, लेकिन अब तक इस मुद्दे को लेकर कोई बड़ा आंदोलन या प्रभावी प्रदर्शन देखने को नहीं मिला है। स्थानीय लोगों का कहना है की विपक्ष भी अपने क्षेत्रों में जल वितरण व्यवस्था को लेकर पर्याप्त सक्रिय नजर नहीं आ रहा है।
अब निगाहें प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर टिकी है, जो इंदौर के प्रभारी मंत्री भी है। शहरवासियों को उम्मीद है की वे इस गंभीर जल संकट में हस्तक्षेप कर राहत दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे।