विश्व प्रसिद्ध जैन तीर्थ मोहनखेड़ा, जो आचार्य दादा गुरु राजेंद्र सूरीश्वरजी महाराज की पुण्यभूमि के रूप में जाना जाता है, इन दिनों ट्रस्टियों, कर्मचारियों और साधु-संतों से जुड़े विवादों के कारण चर्चा में है। इसी बीच 18 और 19 जून को यहां दादा गुरु की 200वीं जन्म शताब्दी के अवसर पर सरदार वल्लभभाई पटेल की स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की तर्ज पर प्रस्तावित "जैन यूनिटी प्रतिमा" के भूमि पूजन और जाजम बोलियों के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
इस आयोजन के लिए मोहनखेड़ा ट्रस्ट द्वारा अत्याधुनिक जैन यूनिटी परिसर निर्माण को लेकर एक वीडियो फिल्म भी जारी की गई है। वहीं आचार्य लेखेंद्र मुनि विजय महाराज ने समाज के लोगों से प्रतिमा निर्माण के लिए मुक्तहस्त से दान देने की अपील की है। जाजम बोलियों में भागीदारी बढ़ाने के लिए भी समाज के लोगों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार ट्रस्ट प्रबंधन को आशंका है कि हालिया विवादों के चलते इस आयोजन में अपेक्षित संख्या में दानदाता पहुंचेंगे या नहीं। ट्रस्टियों के बीच भी मतभेद की चर्चा है, जबकि साधु-संत पहले से ही प्रबंधन के प्रति नाराज बताए जा रहे हैं।
कुछ लोगों का मानना है कि वर्तमान समय में सरकार और वित्तीय एजेंसियां बड़े धार्मिक आयोजनों में होने वाले आर्थिक लेन-देन पर भी नजर रखती हैं। बताया जा रहा है कि बोलियों की शुरुआत एक आनी (3600 रुपये) से होगी और यह राशि हजारों आनी तक पहुंच सकती है, जिससे कुल दान करोड़ों रुपये में हो सकता है। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि दान में दी जाने वाली राशि का स्रोत क्या है और क्या संबंधित खातों की जांच हो सकती है।
उल्लेखनीय है कि पूर्व में राजगढ़ और मोहनखेड़ा क्षेत्र के कुछ लोगों के खातों की जांच वित्तीय एजेंसियों द्वारा किए जाने की चर्चाएं भी सामने आती रही हैं।
मोहनखेड़ा तीर्थ में वर्षों से विभिन्न दानदाताओं द्वारा धर्मशालाओं का निर्माण कराया जाता रहा है। वर्तमान में लगभग 240 कमरों वाली एक धर्मशाला निर्माणाधीन बताई जा रही है, जिसे सूत्रों के अनुसार राजस्थान के किशोर जैन बापसा द्वारा बनवाया जा रहा है। इस निर्माण को लेकर भी समय-समय पर कई आरोप और चर्चाएं सामने आती रही हैं। आरोप यह हैं कि निर्माण के लिए स्वीकृत नक्शा, स्टेटमेंट प्लान तथा व्यय का स्पष्ट विवरण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण प्रबंधन पर सवाल उठ रहे हैं।
दूसरी ओर, मोहनखेड़ा तीर्थ में लगभग 300 कर्मचारी कार्यरत बताए जाते हैं। इनके लिए तीन अलग-अलग रजिस्टर संचालित किए जाने की जानकारी सामने आई है। पहले रजिस्टर में लगभग 70 कर्मचारियों के नाम दर्ज हैं, जिन्हें पीएफ की सुविधा प्राप्त है तथा उनका वेतन बैंक ऑफ इंडिया, राजगढ़ शाखा के माध्यम से दिया जाता है।
दूसरे रजिस्टर में लगभग 125 कर्मचारियों तथा तीसरे रजिस्टर में करीब 102 कर्मचारियों के नाम बताए जाते हैं, लेकिन इन्हें पीएफ का लाभ नहीं मिलने की बात कही जा रही है। इन कर्मचारियों का वेतन गुरु राज सहकारी साख संस्था के माध्यम से खातों में जमा किया जाता है। कुल कर्मचारियों में से केवल लगभग 70 कर्मचारियों को ही पीएफ सुविधा मिलने से प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार विष्णु बरोड़ नामक एक एजेंट कर्मचारियों के पीएफ संबंधी कार्य देखता है। कुछ कर्मचारियों का दावा है कि उन्होंने पीएफ कटौती के लिए आवश्यक दस्तावेज जमा किए, लेकिन प्रबंधन की अनुमति न मिलने के कारण उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल सका।
मोहनखेड़ा में दादा गुरु की विशाल प्रतिमा को खुले परिसर में स्थापित कर क्षेत्र को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना भी चर्चा का विषय बनी हुई है। इस प्रस्ताव को लेकर जैन समाज और साधु-संतों के एक वर्ग द्वारा आपत्ति जताए जाने की बात कही जा रही है।
कुछ लोगों का कहना है कि मोहनखेड़ा में स्थित दादा गुरु का स्वर्ण मंदिर एक प्रमुख धार्मिक स्थल है, जहां श्रद्धालु पूजा-अर्चना और आध्यात्मिक साधना के उद्देश्य से आते हैं। ऐसे में पर्यटन गतिविधियों के बढ़ने से धार्मिक वातावरण प्रभावित होने और अन्य समुदायों के पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही से सुरक्षा संबंधी चिंताएं उत्पन्न होने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
आलोचकों का आरोप है कि कुछ ट्रस्टियों की कार्यशैली के कारण साधु-संतों और कर्मचारियों के बीच संबंध भी प्रभावित हुए हैं। पूर्व में भी कुछ साधु-संतों के साथ अनुचित व्यवहार की शिकायतें सामने आती रही हैं।
राजगढ़ क्षेत्र के विभिन्न समाचार पत्रों में इस प्रकार के विवादों से जुड़ी खबरें प्रकाशित होती रही हैं। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि शिकायतों और पुलिस रिपोर्ट के बावजूद यदि कार्रवाई नहीं होती है तो इससे कई तरह के सवाल खड़े होते हैं। सूत्रों के अनुसार कुछ लोग अब इस मामले को मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री स्तर तक पत्र लिखकर ले जाने की तैयारी कर रहे हैं।